L-4: उद्देशिका (Preamble)
1. प्रस्तावना का परिचय
- आधार: 13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू द्वारा पेश किया गया 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objective Resolution) ही प्रस्तावना का आधार बना।
- प्रेरणा: भारतीय संविधान में प्रस्तावना का विचार अमेरिका के संविधान से लिया गया है।
- भाषा: प्रस्तावना की भाषा ऑस्ट्रेलिया के संविधान से ली गई है।
2. प्रस्तावना के मुख्य शब्द और अर्थ
- "हम भारत के लोग": यह दर्शाता है कि भारतीय संविधान की शक्ति का अंतिम स्रोत भारत की जनता है।
- प्रस्तावना के चार मुख्य घटक:
- सत्ता का स्रोत कौन है: भारत की जनता।
- भारतीय राज्य की प्रकृति: संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य।
- संविधान के उद्देश्य क्या है: न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व।
- अपनाने की तिथि: 26 नवंबर 1949।
3. प्रस्तावना में न्याय (Justice)
भारतीय संविधान की प्रस्तावना में तीन प्रकार के न्याय की बात की गई है:
- सामाजिक न्याय
- आर्थिक न्याय
- राजनीतिक न्याय
नोट: धार्मिक न्याय की बात नहीं की गई है।
4. स्वतंत्रता (Liberty)
प्रस्तावना में पाँच प्रकार की स्वतंत्रता का उल्लेख है:
- विचार
- अभिव्यक्ति
- विश्वास
- धर्म
- उपासना
5. प्रस्तावना में संशोधन
- 42वाँ संविधान संशोधन (1976): इसके द्वारा प्रस्तावना में तीन नए शब्द जोड़े गए:
- समाजवादी (Socialist)
- पंथनिरपेक्ष (Secular)
- अखंडता (Integrity)
- महत्वपूर्ण तथ्य: अब तक प्रस्तावना में केवल एक बार ही संशोधन किया गया है।
6. प्रमुख वाद (Important Cases)
- बेरुबारी यूनियन वाद (1960): सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि प्रस्तावना संविधान का अंग नहीं है।
- केशवानंद भारती वाद (1973): इसमें सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग है और इसमें संशोधन किया जा सकता है, लेकिन इसके 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) को नहीं बदला जा सकता।
💡 मुख्य तथ्य
• प्रस्तावना का आधार जवाहरलाल नेहरू का उद्देश्य प्रस्ताव था।
• 42वें संशोधन द्वारा 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए।
• केशवानंद भारती मामले में प्रस्तावना को संविधान का अभिन्न अंग माना गया।
• 42वें संशोधन द्वारा 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए।
• केशवानंद भारती मामले में प्रस्तावना को संविधान का अभिन्न अंग माना गया।