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अध्याय - 7: भारत में कृषि एवं पशुपालन


अध्याय - 7: भारत में कृषि एवं पशुपालन

भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। देश की एक बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि और उससे जुड़े सहायक व्यवसायों पर निर्भर करती है। मानसूनी दशाओं, भौगोलिक विविधता और मिट्टी के प्रकारों के आधार पर देश में विभिन्न फसलें उगाई जाती हैं।

1. प्रमुख फसल ऋतुएँ (Cropping Seasons)

भारत में तापमान और वर्षा की स्थिति के अनुसार कृषि वर्ष को मुख्य रूप से तीन फसल चक्रों में विभाजित किया गया है:

  • खरीफ की फसलें: इन फसलों की बुवाई मानसून के आगमन के साथ (जून-जुलाई) होती है और कटाई अक्टूबर-नवंबर में की जाती है (जैसे- धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, कपास, सोयाबीन)।
  • रबी की फसलें: इनकी बुवाई शीत ऋतु की शुरुआत में (अक्टूबर-नवंबर) होती है और कटाई मार्च-अप्रैल में की जाती है (जैसे- गेहूं, जौ, चना, मटर, सरसों)।
  • जायद की फसलें: यह रबी और खरीफ के बीच ग्रीष्मकाल (मार्च से जून) में उगाई जाने वाली अल्पकालिक फसलें हैं (जैसे- तरबूज, ककड़ी, खीरा और चारा फसलें)।
2. फसलों का वर्गीकरण

उपयोग और आर्थिक महत्व के आधार पर फसलों को निम्नलिखित श्रेणियों में रखा जाता है:

  • खाद्यान्न फसलें: जिनके अंतर्गत मुख्य रूप से गेहूं, चावल, मक्का और दलहन शामिल हैं।
  • नकदी फसलें (Cash Crops): जिन्हें व्यापारिक उद्देश्यों के लिए उगाया जाता है (जैसे- गन्ना, कपास, जूट, तंबाकू)।
  • बागानी फसलें (Plantation Crops): चाय, कॉफी, रबर और मसाले।
💡 मुख्य तथ्य एवं क्रांतियाँ
• भारत में 'हरित क्रांति' के जनक एम. एस. स्वामीनाथन माने जाते हैं, जिससे खाद्यान्न उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई थी।
• श्वेत क्रांति का संबंध दुग्ध उत्पादन से तथा पीली क्रांति का संबंध तिलहन उत्पादन से है।
3. प्रमुख कृषि क्रांतियाँ
क्रांति का नाम संबंधित क्षेत्र / उत्पादन
हरित क्रांति खाद्यान्न उत्पादन (मुख्यतः गेहूं और चावल)
श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड) दुग्ध उत्पादन
नीली क्रांति मत्स्य ( मछली) उत्पादन
पीली क्रांति तिलहन उत्पादन (सरसों, सूरजमुखी आदि)
भूरेरी (धूसर) क्रांति उर्वरक उत्पादन

Author: PassProMax Team

Last Updated: July 20, 2026