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अध्याय - 6: भारत की प्राकृतिक वनस्पति एवं मृदा


अध्याय - 6: भारत की प्राकृतिक वनस्पति एवं मृदा

किसी भी क्षेत्र की प्राकृतिक वनस्पति वहाँ की जलवायु, वर्षा और तापमान पर निर्भर करती है। भारत में भौगोलिक विविधता के कारण विभिन्न प्रकार के वन और مृदा (मिट्टी) के प्रकार पाए जाते हैं, जो देश की पारिस्थितिकी और कृषि व्यवस्था के आधार स्तंभ हैं।

1. भारतीय वनों के प्रमुख प्रकार

वर्षा की मात्रा और क्षेत्रीय विशेषताओं के आधार पर भारतीय वनों को मुख्य वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है:

  • उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन: यह वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वार्षिक वर्षा 200 सेमी से अधिक होती है (जैसे- पश्चिमी घाट, अंडमान-निकोबार और पूर्वोत्तर राज्य)।
  • उष्णकटिबंधीय पर्णपाती (पातिझड़) वन: इन्हें मानसूनी वन भी कहा जाता है, जहाँ वर्षा 70 से 200 सेमी के बीच होती है।
  • कंटक वन एवं झाड़ियाँ: यह 70 सेमी से कम वर्षा वाले शुष्क क्षेत्रों (जैसे- राजस्थान, गुजरात, हरियाणा) में पाए जाते हैं।
  • पर्वतीय वन: ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान में कमी के कारण हिमालयी क्षेत्रों में इस प्रकार की वनस्पति मिलती है।
  • मैंग्रोव (दलदली) वन: यह तटीय डेल्टा क्षेत्रों (विशेषकर सुंदरवन) में उगते हैं जहाँ खारा पानी और दलदली भूमि होती है।
2. भारत की प्रमुख मृदा (मिट्टी) के प्रकार

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अनुसार भारत में मुख्य रूप से आठ प्रकार की मिट्टियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:

  • जलोढ़ मृदा (Alluvial Soil): यह देश के सबसे बड़े हिस्से पर फैली है और नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी से बनती है, जो अत्यधिक उपजाऊ होती है।
  • काली मृदा (Black Soil): इसे रेगुर मिट्टी या कपासी मृदा भी कहते हैं, इसका निर्माण लावा के टूटने से होता है और इसमें नमी बनाए रखने की क्षमता अधिक होती है।
  • लाल एवं पीली मृदा (Red and Yellow Soil): रवेदार आग्नेय चट्टानों के टूटने से बनने वाली यह मिट्टी लोहे के अंश के कारण लाल दिखाई देती है।
  • लैटेराइट मृदा (Laterite Soil): यह अधिक वर्षा और अत्यधिक तापमान वाले क्षेत्रों में पाई जाती है, जहाँ मिट्टी के पोषक तत्व पानी में बह जाते हैं।
💡 मुख्य बिंदु एवं विशेषताएँ
• भारत में क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे अधिक क्षेत्रफल पर 'जलोढ़ मृदा' पाई जाती है।
• काली मिट्टी (रेगुर मिट्टी) कपास की खेती के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।
3. प्रमुख मिट्टियों का संक्षेप विवरण
मृदा का प्रकार मुख्य विशेषता / उपजाऊपन प्रमुख फसलें
जलोढ़ मृदा देश के लगभग 43% भाग पर विस्तृत, अत्यंत उपजाऊ। गेहूं, धान, गन्ना, दलहन
काली मृदा स्वतः जुताई वाली मिट्टी, जल धारण क्षमता उच्च। कपास, सोयाबीन, मूंगफली
लाल मृदा आयरन ऑक्साइड की अधिकता, उर्वरता की कमी। बाजरा, दालें, मूंगफली
लैटेराइट मृदा अम्लीय प्रकृति, चाय-कॉफी के लिए उपयुक्त। चाय, कॉफी, काजू, रबर

Author: PassProMax Team

Last Updated: July 20, 2026