अध्याय - 5: भारत की जलवायु
भारत की जलवायु मुख्य रूप से मानसूनी प्रकार की है। देश की भौगोलिक स्थिति, उच्चावच और वायुदाब की पेटियों का यहाँ की मौसमी दशाओं पर गहरा प्रभाव पड़ता है। मानसूनी हवाओं की दिशा में मौसमी बदलाव के कारण यहाँ वर्ष भर में भिन्न-भिन्न ऋतुएँ देखने को मिलती हैं।
1. भारतीय जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में तापमान और वर्षा की मात्रा में भिन्नता पाई जाती है, जिसके प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं:
- अस्थिति तथा अक्षांश: कर्क रेखा देश के मध्य से गुजरने के कारण दक्षिणी हिस्सा उष्ण कटिबंध और उत्तरी हिस्सा उपोष्ण कटिबंध में आता है।
- हिमालय पर्वत: उत्तर में स्थित यह विशाल पर्वत श्रृंखला मध्य एशिया से आने वाली बर्फीली हवाओं को रोकती है और मानसूनी हवाओं को मोड़कर भारत में वर्षा कराती है।
- समुद्र से दूरी: तटीय क्षेत्रों में समकारी जलवायु पाई जाती है जबकि आंतरिक भागों में विषम जलवायु होती है।
- वायुदाब एवं पवनें: धरातलीय हवाओं, ऊपरी वायुमचलीय जेट स्ट्रीम और पश्चिमी विक्षोभ का यहाँ विशेष प्रभाव रहता है।
2. भारत की प्रमुख ऋतुएँ
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार भारत में वर्ष भर को चार प्रमुख ऋतुओं में विभाजित किया गया है:
- शीत ऋतु (Winter Season): दिसंबर से फरवरी तक, जिसमें उत्तर भारत में तापमान कम और शुष्क हवाएँ चलती हैं।
- ग्रीष्म ऋतु (Summer Season): मार्च से मई तक, जिसमें अत्यधिक गर्मी और उत्तर-पश्चिम भारत में 'लू' नामक गर्म पवनें चलती हैं।
- वर्षा ऋतु / दक्षिण-पश्चिम मानसून (Rainy Season): जून से सितंबर तक, जिसमें देश की 75% से अधिक वर्षा मानसूनी हवाओं से होती है।
- शरद ऋतु / उत्तर-पूर्वी मानसून (Retreating Monsoon): अक्टूबर से नवंबर, जिसे लौटते हुए मानसून की ऋतु भी कहा जाता है।
💡 मुख्य तथ्य एवं विशेषताएँ
• भारत में सबसे अधिक वर्षा मेघालय के 'मासिनराम' (Mawsynram) में होती है।
• शीतकाल में तमिलनाडु के तटों पर वर्षा 'लौटते हुए मानसून' या उत्तर-पूर्वी मानसून के कारण होती है।
• शीतकाल में तमिलनाडु के तटों पर वर्षा 'लौटते हुए मानसून' या उत्तर-पूर्वी मानसून के कारण होती है।
3. मानसून की शाखाएँ
| मानसून की शाखा | मुख्य क्षेत्र एवं प्रभाव |
|---|---|
| अरब सागर शाखा | यह पश्चिमी घाट से टकराकर केरल और पश्चिमी तट पर भारी वर्षा करती है और आगे बढ़कर उत्तर भारत तक पहुँचती है। |
| बंगाल की खाड़ी शाखा | यह पूर्वोत्तर भारत (असम, मेघालय) तथा म्यांमार के अराकान योमा से टकराकर बंगाल एवं गंगा की घाटी की ओर मुड़ जाती है। |