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अध्याय - 19: भारतीय की कृषि


अध्याय - भारत की कृषि (Agriculture in India)

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ की कुल कार्यशील जनसंख्या का एक बहुत बड़ा हिस्सा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि एवं उससे संबंधित गतिविधियों पर निर्भर करता है। भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि रीढ़ की हड्डी के समान है, जो देश की खाद्य सुरक्षा और उद्योग जगत के लिए कच्चे माल की आपूर्ति दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

1. भारतीय कृषि की प्रमुख विशेषताएँ

भारतीय कृषि की अपनी कुछ खास भौगोलिक और सामाजिक विशेषताएँ हैं, जो इसे अन्य क्षेत्रों से अलग बनाती हैं:

  • मानसून पर अत्यधिक निर्भरता: भारतीय कृषि को "मानसून का जुआ" भी कहा जाता है क्योंकि सिंचाई के साधनों के विकास के बावजूद एक बड़ा हिस्सा आज भी वर्षा पर निर्भर है।
  • खाद्यान्न फसलों की प्रधानता: यहाँ कुल कृषि क्षेत्र के अधिकांश भाग पर खाद्यान्न (जैसे चावल और गेहूं) उगाए जाते हैं।
  • कृषि जोतों का छोटा आकार: भूमि के लगातार विभाजन के कारण कृषि जोतों का आकार छोटा और बिखरा हुआ है, जिससे आधुनिक यंत्रों का उपयोग कठिन हो जाता है।
  • विविधता: यहाँ उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय दोनों प्रकार की फसलें उगाने की अनुकूल जलवायु पाई जाती है।
2. ऋतुओं के आधार पर फसलों का वर्गीकरण

भारत में तापमान, वर्षा और जलवायु की उपलब्धता के आधार पर फसलों को मुख्य रूप से तीन ऋतुओं में बांटा गया है:

ऋतु / प्रकार बुवाई का समय कटाई का समय प्रमुख फसलें
खरीफ फसलें जून - जुलाई (मानसून का आगमन) सितंबर - अक्टूबर धान (चावल), ज्वार, बाजरा, मक्का, कपास, जूट, मूंगफली, सोयाबीन, अरहर
रबी फसलें अक्टूबर - नवंबर (शीत ऋतु) मार्च - अप्रैल (ग्रीष्म ऋतु) गेहूं, जौ, चना, मटर, सरसों, मसूर, आलू
जायद फसलें मार्च (रबी और खरीफ के मध्य) जून तरबूज, खरबूज, ककड़ी, खीरा, चारा फसलें और विभिन्न सब्जियां
3. उपयोग और उत्पादन के आधार पर फसलों के प्रकार
  • खाद्यान्न फसलें: चावल, गेहूं, मक्का, ज्वार, बाजरा और विभिन्न प्रकार की दालें।
  • नकदी या व्यावसायिक फसलें (Cash Crops): गन्ना, कपास, जूट, तंबाकू और तिलहन, जिन्हें मुख्य रूप से बाजार में बेचकर लाभ कमाने के लिए उगाया जाता है।
  • बागानी फसलें (Plantation Crops): चाय, कॉफी, रबर, मसाले और बागवानी (फल व फूल)।
4. प्रमुख कृषि क्रांतियाँ (Agricultural Revolutions)

कृषि उत्पादन में गुणात्मक और मात्रात्मक सुधार लाने के लिए विभिन्न क्रांतियों की शुरुआत की गई:

  • हरित क्रांति: खाद्यान्न उत्पादन (विशेषकर गेहूं और चावल) में वृद्धि। (भारत में जनक: एम. एस. स्वामीनाथन)
  • श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड): दुग्ध (दूध) उत्पादन में वृद्धि। (जनक: डॉ. वर्गीज कुरियन)
  • नीली क्रांति: मत्स्य (मछली) उत्पादन में वृद्धि।
  • पीली क्रांति: तिलहन उत्पादन में वृद्धि।
  • सुनहरी क्रांति: बागवानी और शहद उत्पादन में वृद्धि।
  • रजत क्रांति: अंडा एवं मुर्गी पालन उत्पादन।
  • गुलाबी क्रांति: झींगा मछली या प्याज उत्पादन।
  • भूरे रंग की क्रांति: उर्वरक उत्पादन या कोको उत्पादन।
5. भारत की प्रमुख फसलें और उनका भौगोलिक विवरण

चावल (Rice): यह भारत की सबसे प्रमुख खाद्यान्न फसल है। इसके लिए उच्च तापमान (25°C से अधिक), उच्च आर्द्रता और 100 सेमी से अधिक वर्षा की आवश्यकता होती है। यह मुख्य रूप से पूर्वी और दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में उगाई जाती है।

गेहूं (Wheat): यह भारत की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है जो उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में उगाई जाती है। इसके लिए मध्यम तापमान (10°C से 25°C) और 50 से 75 सेमी वर्षा की आवश्यकता होती है।

दालें (Pulses): भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। दालें मिट्टी की उर्वरता को नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) के माध्यम से पुनर्स्थापित करती हैं (जैसे- चना, मटर, मूंग, उड़द)।

गन्ना (Sugarcane): यह एक नकदी और उष्णकटिबंधीय फसल है। इसके लिए गर्म और नम जलवायु (21°C से 27°C तापमान) तथा 75 से 100 सेमी वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र इसके प्रमुख उत्पादक हैं।

💡 सिंचाई एवं अन्य महत्वपूर्ण बिंदु
• भारत में सिंचाई के प्रमुख साधन नलकूप (Tube-wells), कुएँ, नहरें और तालाब हैं।
• उत्तर भारत में नलकूपों और नहरों का जाल अधिक है, जबकि दक्षिण भारत में तालाबों और वर्षा आधारित जल संचयन प्रणालियों का विशेष महत्व है।

Author: PassProMax Team

Last Updated: July 20, 2026